Main Tumhe Roz Yaad Karta Hun | Abdus Samad Ansari | The Social House Poetry

About This Poetry :- The beautiful Ghazal  'Main Tumhe Roz Yaad Karta Hun' for The Social House is presented by Abdus Samad Ansari and also written by him which is very beautiful and delightful.

About This Poetry :- The beautiful Ghazal  ‘Main Tumhe Roz Yaad Karta Hun’ for The Social House is presented by Abdus Samad Ansari and also written by him which is very beautiful and delightful. 


Main Tumhe Roz Yaad Karta Hun

ख़ाक की तह में उतरने के लिए जीते हैं 
अजीब लोग हैं मरने के लिए जीते हैं

अपनी हस्ती मिटा रहा हूं मैं 
उसके कूचे में जा रहा हूं मैं 
मैं तुम्हें रोज याद करता हूं 
क्या तुम्हें याद आ रहा हूं मैं?
तुम जो सुन लो तो मेहरबानी हो 
किस्सा-ए-गम सुना रहा हूं मैं 
देख पाओ जो मुझको देखो तुम
आज क्यों मुस्कुरा रहा हूं मैं 
मैं तो जिंदगी का एक झोंका हूं 
जरा ठहरो के आ रहा हूं मैं 

हर मोहब्बत होती नहीं है कुछ पाने के लिए 
शम्स डूबता है चांद को जगाने के लिए 
इश्क़ पहला हर किसी को याद रहता है
कुछ हादसे होते नहीं है भूलाने के लिए

बतलाऊं तुम्हें क्या?
मुझे हालात ने मारा 
हालात को मेरे, मेरे जज्बात ने मारा
ऐसे ना मुझे हिज्र के लम्हात ने मारा
जैसे कि मुझे तेरी मुलाकात ने मारा 

हर बात पे एक जुल्म है 
हर बात पे तकरार 
जालिम कि मुझे देखिए हर बात ने मारा 
जो तीर मेरे सीने पे वो मार ना पाया 
वो तीर मेरी पुश्त पे उस बदजात ने मारा 
कुछ मुझको ख़यालात से उम्मीद थी लेकिन 
आए जो ख़यालात, ख़यालात ने मारा
बतलाऊं तुम्हें क्या मुझे हालात ने मारा

                         – Abdus Samad Ansari