Kaun Aayega Yahan – Kaif Bhopali | Ghazal

This beautiful ghazal 'Kaun Aayega Yahan' has written by Kaif Bhopali.

 Difficult Words  
दिल-ए-नादाँ = निर्दोष हृदय वाला, अदूरदर्शी, सुधारक।
शाख़-ए-गुल = फूलों वाली एक शाखा।

Kaun Aayega Yahan

Kaun aayega yahan koi na aaya hoga
Mera darwaaza hawaoon ne hilaya hoga 
Dil-e-nadaan na dhadak ae dil-e-nadaan na dhadak 
Koi khat leke padosi ke ghar aaya hoga
 
Is gulistan ki yahi reet hai ae shakh-e-gul 
Tu ne jis phool ko pala wo paraya hoga 
Dil ki qismat hi mein likkha tha andhera shayad 
Warna masjid ka diya kis ne bujhaya hoga
Gul se lipti hui titli ko girakar dekho  Aandhiyon tumne darkhaton ko giraya hoga 
Khelne ke liye bacche nikal aaye honge 
Chaand ab us ki gali mein utar aaya hog
Kaif pardes mein mat yaad karo apna makaan 
Ab ki baarish mein usse tod ke giraya hoga
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा 
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा 
दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क 
कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा 
इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल 
तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा
दिल की क़िस्मत ही में लिक्खा था अंधेरा शायद 
वर्ना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा 
गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो 
आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा 
खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे 
चाँद अब उस की गली में उतर आया होगा
‘कैफ़’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ 
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा।
                                            – Kaif Bhopali