Yah Prithvi Rahegi – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

यह पृथ्वी रहेगी | केदारनाथ सिंह केदारनाथ सिंह जी कविताओं को पढ़ते हुए ध्यान आता है कि इनकी कविताओं में बड़ी-बड़ी बातों को कितने सहज शब्दों में लिखा गया है, अन्य कवियों की तरह नही की जो कठिनतम बिंबों और भारी-भरकम शब्‍दों से कविता को ऐसा उलझाते हैं कि उसे पढ़ कर एक विरोधी भी चक्कर … Read more

Ek Kavita – Nirala Ko Yaad Karte Hue | Kedarnath Singh | Hindi Kavita

एक कविता – निराला को याद करते हुए | केदारनाथ सिंह  ‘अकाल में सारस‘ केदार जी द्वारा लिखी गई एक काव्य संग्रह है जिसमें ये कविता ‘एक कविता – निराला को याद करते हुए‘ भी शामिल है।  एक कविता – निराला को याद करते हुए उठता हाहाकार जिधर है उसी तरफ अपना भी घर है खुश … Read more

Adiyal Saans – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

अड़ियल साँस | केदारनाथ सिंह ‘अकाल में सारस‘ नामक कविता-संग्रह जिसमें यह कविता ‘अड़ियल सांस‘ भी सम्मिलित है। केदार जी की अधिकतम कविताओं में आस पास की चीजों का जिक्र होता है। जैसे कि इस कविता में काई, घास, पत्थर जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है। केदार जी कविताओं का वर्णन नहीं चित्रण किया करते थे। … Read more

Khol Doon Yah Aaj Ka Din – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

खोल दूं यह आज का दिन | केदारनाथ सिंह खोल दूं यह आज का दिन खोल दूं यह आज का दिन जिसे- मेरी देहरी के पास कोई रख गया है, एक हल्दी-रंगे ताजे दूर देशी पत्र-सा। थरथराती रोशनी में, हर संदेशे की तरह यह एक भटका संदेश भी अनपढा ही रह न जाए- सोचता हूँ … Read more

Ant Mahaz Ek Muhawra Hai – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

अंत महज एक मुहावरा है | केदारनाथ सिंह अंत महज एक मुहावरा है अंत में मित्रों, इतना ही कहूंगा कि अंत महज एक मुहावरा है जिसे शब्द हमेशा  अपने विस्फोट से उड़ा देते हैं और बचा रहता है हर बार वही एक कच्चा-सा आदिम मिट्टी जैसा ताजा आरंभ जहां से हर चीज फिर से शुरू … Read more

Dupahariya – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

दुपहरिया | केदारनाथ सिंह शब्द अर्थ धूसर धूल के रंग का, खाकी। सुधि होश,चेतना,स्मरण,याद,ज्ञान। उन्मन उदास। चौबाई चारों ओर से बहनेवाली हवा। रुखाई रूखापन, रुखावट, कठोरता। दुपहरिया झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की, उड़ने लगी बुझे खेतों से झुर-झुर सरसों की रंगीनी, धूसर धूप हुई मन पर ज्यों- सुधियों की चादर … Read more

Chhoti Sehar Ki Ek Dopahar – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

छोटे शहर की एक दोपहर | केदारनाथ सिंह छोटे शहर की एक दोपहर’ कविता केदारनाथ जी द्वारा लिखी गई है। यह एक हिन्दी कविता है जिसमें छोटे शहर में जब चिलचिलाती धूप का सामना उस शहर के पशु-पक्षी और वहां के लोग करते हैं तो वहां किस तरह का माहौल होता है इस कविता में … Read more

अकाल में सारस – केदारनाथ सिंह | हिन्दी कविता

अकाल में सारस `| केदारनाथ सिंह ‘ अकाल में सारस ‘ केदारनाथ सिंह जी की कविताओं का काव्य-संग्रह है । इसकी कविताएँ सन् 1983 से 87 के बीच लिखी गयी हैं । केदारनाथ सिंह जी की कविताओं में एक अलग ही आकर्षण होता है, आसपास की साधारण सी लगने वाली चीजें उनकी कविता के विषय … Read more

Banaras' – Hindi Kavita By Kedarnath Singh

बनारस | केदारनाथ सिंह | हिन्दी कविता ‘बनारस‘ केदारनाथ सिंह जी द्वारा लिखी गई चर्चित कविताओं में से एक है। ‘यहां से देखो‘ एक काव्य-संग्रह केदारनाथ जी द्वारा लिखी गई है जिसमें सम्मिलित कविताओं में से यह एक कविता ‘बनारस‘ भी है। Banaras इस शहर में वसंत अचानक आता है और जब आता है तो … Read more

Shaharbadal – Kedarnath Singh | Hindi Kavita

शहरबदल | केदारनाथ सिंह  शहरबदल वह एक छोटा-सा शहर था जिसे शायद आप नहीं जानते पर मैं ही कहाँ जानता था वहाँ जाने से पहले कि दुनिया के नक्शे में कहाँ है वह ! लेकिन दुनिया शायद उन्हीं छोटे-छोटे शहरों के ताप से चलती है जिन्हें हम-आप नहीं जानते। जाने को तो मैं जा सकता था … Read more